चरनोई की सरकारी भूमि पर दरगाह का निर्माण मामले में सिविल कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला तहसीलदार के बेदखली आदेश के विरुद्ध दायर अपील खारिज

रतलाम सैलाना मार्ग के ग्राम बंजली स्थित करोड़ों रुपए मूल्य की सरकारी चरनोई भूमि पर हजरत मस्तान शाह बाबा दरगाह के नाम से किए गए निर्माण और अतिक्रमण के मामले में रतलाम के दशम व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ खण्ड) अरुण सिंह ठाकुर ने मुतवल्ली फिरोज मस्तान बाबा द्वारा प्रस्तुत अंतरिम स्थगन के आवेदन को निरस्त कर दिया है। यह आवेदन तहसीलदार रतलाम शहर द्वारा पारित बेदखली आदेश के विरुद्ध दायर वाद क्रमांक 184ए/2026 में प्रस्तुत किया गया था।
जानकारी के अनुसार, न्यायालय ने अपने आठ पृष्ठीय आदेश में कहा कि वादी ऐसा कोई दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया जिससे यह सिद्ध हो सके कि मध्य प्रदेश शासन ने संबंधित सरकारी चरनोई भूमि उसे अथवा किसी ट्रस्ट या कमेटी को आवंटित की थी या वहां निर्माण करने की अनुमति प्रदान की थी। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन द्वारा उर्स के आयोजन के लिए दी जाने वाली सीमित अवधि की अनुमति से संबंधित भूमि पर स्वामित्व अथवा स्थायी निर्माण का अधिकार प्राप्त नहीं होता।
हम आपको बता दें कि
तहसीलदार रतलाम शहर द्वारा पारित बेदखली आदेश के विरुद्ध मुतवल्ली फिरोज मस्तान बाबा ने दशम व्यवहार न्यायाधीश रतलाम के न्यायालय में वाद प्रस्तुत करते हुए तहसीलदार के नोटिस एवं कार्रवाई को शून्य घोषित करने तथा आदेश 39 नियम 1 एवं 2 के तहत अस्थायी निषेधाज्ञा यानी स्थगन देने की मांग की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड का परीक्षण किया। आदेश में कहा गया कि वादी की ओर से ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह प्रमाणित हो कि संबंधित सरकारी चरनोई भूमि शासन द्वारा वादी, किसी ट्रस्ट अथवा कमेटी को आवंटित की गई थी अथवा वहां निर्माण की अनुमति दी गई थी।
न्यायालय ने तहसीलदार की कार्रवाई के संबंध में कहा कि वादी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और उसे अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त अवसर दिया गया। इसलिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं होने के आधार पर राजस्व न्यायालय की कार्रवाई को अवैध नहीं माना जा सकता।
आदेश में मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए न्यायालय ने कहा कि धारा 248 के तहत पारित आदेशों के विरुद्ध धारा 257 के अंतर्गत अपील अथवा रिवीजन का अधिकार राजस्व न्यायालयों, जैसे एसडीओ अथवा कलेक्टर को है। इस स्थिति में सिविल कोर्ट के समक्ष राजस्व न्यायालय की कार्रवाई को चुनौती देकर अंतरिम राहत प्राप्त करने का आधार वादी स्थापित नहीं कर सका।
न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि वादी अपने पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला सिद्ध करने में असफल रहा है। इसी आधार पर अस्थायी निषेधाज्ञा के लिए प्रस्तुत आवेदन निरस्त कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार ग्राम बंजली स्थित सरकारी चरनोई भूमि के सर्वे क्रमांक 44 का कुल रकबा 0.200 हेक्टेयर है। इसमें से लगभग 0.03 हेक्टेयर भूमि पर हजरत मस्तान शाह बाबा दरगाह के नाम पर कब्जा कर निर्माण किए जाने की शिकायत ग्राम धामनोद निवासी एवं बजरंग दल रतलाम विभाग सह संयोजक नरेन्द्र शर्मा (बंटी बजरंगी) ने प्रशासनिक अधिकारियों से की थी। मामले में नीलेश सोनी, ललित गोस्वामी, राजेश कटारिया, मुकुल पँवार, बंटी शर्मा, सिद्धार्थ पंड्या, डॉ. जितेंद्र वर्मा, कुंदन गवली, गनी शक्तावत, राजाराम ओहरी, गौरव शर्मा, मुन्नू कुशवाह आदि हिन्दू संगठनों द्वारा प्रशासन को ज्ञापन भी दिया गया था जिसमें अतिक्रमण हटाने की मांग की गई थी।
शिकायत के आधार पर तहसीलदार रतलाम शहर द्वारा दर्ज राजस्व प्रकरण के इस मामले में स्थल निरीक्षण करवाते हुए पटवारी रिपोर्ट और पंचनामा तैयार कराया गया। सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करने के बाद 26 जून 2026 को तहसीलदार न्यायालय ने संबंधित भूमि को सरकारी चरनोई दर्ज पाते हुए अवैध कब्जा प्रमाणित माना। तहसीलदार ने मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 248 के तहत अतिक्रमणकर्ता को भूमि से बेदखल करने के साथ ही 3 हजार रुपए का अर्थदंड लगाने का आदेश पारित किया था।
न्यायालय द्वारा अंतरिम स्थगन आवेदन निरस्त किए जाने के बाद शिकायतकर्ता नरेन्द्र शर्मा ने कलेक्टर रतलाम, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तथा तहसीलदार रतलाम शहर को लिखित आवेदन के साथ न्यायालय के आदेश की प्रति प्रस्तुत करते हुए मांग की कि राजस्व न्यायालय द्वारा अतिक्रमण के संबंध में आदेश पारित किए जाने और सिविल कोर्ट से भी अंतरिम राहत नहीं मिलने की स्थिति में ग्राम बंजली स्थित सरकारी चरनोई भूमि से अवैध कब्जे एवं निर्माण को नियमानुसार तत्काल हटाया जाए और भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।







