तप आराधना के महाकुंभ पर दूसरे चरण में सात और मासक्षमण की तपस्या संपन्न हुई
अनुपम अनुभूति वर्षावास के 75 दिन में कुल 16 मासक्षमण सबसे बड़ी उपलब्धि रही

सैलाना । अनुपम अनुभूति वर्षावास के तहत आचार्यश्री उमेशमुनिजी म.सा. के सुशिष्य धर्मदास गणनायक प्रवर्तक श्री जिनेंद्रमुनिजी म.सा.की आज्ञानुवर्ती पुण्य पुंज साध्वी श्री पुण्यशीलाजी म .सा .की सुशिष्या साध्वी श्री अनुपमशीलाजी म. सा. नेहप्रभाजी ,चतुर्गुणाजी , प्रतिज्ञाजी, अंजलिजी , गुणज्ञाजी, अर्पणाजी
आदि ठाणा 7 के पावन सानिध्य में तप आराधना के इस महा कुंभ में अनेक तपस्वीरत्न श्रावक श्राविकाओं ने कर्मों की निर्जरा करते हुए धर्म नगरी सैलाना के अनुपम अनुभूति चातुर्मास को ऐतिहासिक बना दिया।

इस चातुर्मास में पूज्या महासतीयां की प्रेरणा से युवा वर्ग के श्रावक श्राविकाओं की तपस्या सबसे बड़ी उपलब्धि रही।

स्थानीय देवरी चौक स्थित आराधना भवन पर पूज्या अनुपम शिलाजी के पावन सानिध्य में पहले चरण में 9 मासक्षमण तपस्याएं पूर्ण होने के बाद दूसरे चरण में वंदन संदीप सालेचा ओरा 33
सारिका रितेश संघवी 31 उपवास , हिना अभिनव सियाल 31,

संजय मदन लाल संघवी 31 उपवास , भंवरलाल राजमल संघवी 31 उपवास, श्री जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ के वरिष्ठ सदस्य तरुण रामलाल बाफना 33 उपवास, सौरभ रखब चंद मांडोत 30,श्रेणिक मथुरालाल लोढ़ा 11 उपवास की तपस्या पूर्ण होने के साथ ही साथ गुप्त तपस्या के अतिरिक्त अन्य तपस्या भी जारी है।

इसके पूर्व 16 उपवास की 6 तपस्या, के अतिरिक्त15,13 उपवास,11-11 के पांच तपस्वी,9 उपवास के 14 तपस्वी तथा 19 अठ्ठाई अब तक सम्पन्न हो चुकी।

श्री वर्धमान स्थानक वासी जैन संघ के तत्वावधान में सभी तपस्वीरत्नों के अनुमोदनार्थ तप से तप की बोली लगा कर अलग अलग दिनों में बहुमान किया गया।

अन्य तपस्याओं में अखंड तेले,उपवास, एकासन के वर्षीतप गतिमान हैं।

विगत दिनों अणु स्मृति के अवसर पर तीन दिवसीय आराधना में 300 से अधिक एकासन सम्पन्न हुए।

चातुर्मास काल के संपन्न 75 दिनों में अखंड तेला तप,आयंबिल सहित अन्य गुप्त तपस्या गतिमान है।






