चचेरे भाई ने दोस्तों के साथ मिलकर हिम्मतसिंह को मौत के घाट उतारा था

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रतलाम के चर्चित हिम्मतसिंह हत्याकांड में न्यायालय का बड़ा फैसला हत्या करने वाले 3 हत्यारों को आजीवन कारावास

विजय सिंह


रतलाम जिले के सैलाना थाना क्षेत्र के धामनोद चौकी अंतर्गत
खेत की मेड़ के विवाद को लेकर की गई हत्या के चर्चित मामले में न्यायालय ने सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव ने वैज्ञानिक, फोरेंसिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर 3 आरोपियों को दोषसिद्ध करते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रकरण की पैरवी कर रहे अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने बताया कि 9 नवम्बर. 2024 को थाना सैलाना क्षेत्र की धामनोद चौकी के ग्राम दिवेल में मृतक हिम्मत सिंह (48) पिता करण सिंह जाति राजपूत निवासी ग्राम खेड़ी की हत्या हो गई थी। मृतक के भाई चंद्रसिंह ने इसकी सूचना धामनोद चौकी पर दी थी।
सूचना पर धामनोद चौकी प्रभारी आनंद बागवान मौके पर पहुंचे थे तो मृतक हिम्मत सिंह अपने खेत में खटिया के पास जमीन पर मृत पड़ा हुआ था। उसके दोनों हाथ और बायां पैर टूटा हुआ था, शरीर पर चोटें थी और कपड़ों पर खून लगा था। मौके से पुलिस ने खून लगा पत्थर, खून लगी गोदड़ी, आम के पेड़ के नीचे से बीड़ी के अधजले टुकड़े और हरे रंग की बियर की बोतल के टुकड़े जप्त किए थे। मृतक के भाई कमलसिंह की रिपोर्ट पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज किया गया था।

दीपक आरोपी


जांच के दौरान धामनोद चौकी प्रभारी आनंद बागवान को मृतक के चचेरे भाई विजयसिंह के मोबाइल में घटना से संबंधित कॉल रिकॉर्डिंग मिली। संदेह के आधार पर पूछताछ में खुलासा हुआ कि खेत के सेड़े के विवाद में विजयसिंह ने अपने दोस्तों दीपक एवं जसवंत के साथ मिलकर योजनाबद्ध तरीके से हिम्मत सिंह की हत्या की है। पुलिस ने विजय सिंह का मोबाइल जप्त किया। बाद में आरोपी दीपक ने सैलाना न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। जिसके बाद उसे और आरोपी जसवंत को गिरफ्तार कर घटना में प्रयुक्त लकड़ी एवं मोटरसाइकिल जप्त की गई थी।

जसवंत आरोपी


शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार के अनुसार इस हत्याकांड की पुष्टि डीएनए (DNA), फॉरेंसिक रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल विश्लेषण सहित अन्य साक्ष्यों से हुई जिसमें आरोपी विजयसिंह व दीपक के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग की ट्रांस्क्रिप्ट और वॉयस सैंपल का मिलान वॉयस लैब भोपाल में कराने पर समानता पाई गई, मोबाइल कंपनियों से प्राप्त कॉल डिटेल, सीएएफ व डेटा विश्लेषण से सिद्ध हुआ कि घटना के पहले और बाद में सभी आरोपी लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे, मृतक के शव के पास से जप्त गोदड़ी और दीपक से जप्त लकड़ी पर मृतक हिम्मत सिंह का ही खून पाया गया, जप्त बियर की बोतल के कांच के टुकड़े व बीड़ी के अधजले टुकड़ों पर मिली लार आरोपी जसवंत की निकली।
इसमें अहम बात यह रही कि न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि आरोपी जसवंत थावरिया बाजार रतलाम का रहने वाला है‌ं।उसके द्वारा उपयोग किए गए बीड़ी के टुकड़े घटनास्थल दिवेल पर कैसे पहुंचे और घटना के पहले व बाद में सभी आरोपी एक-दूसरे से संपर्क में किस कारण से थे, इससे उनकी संलिप्तता स्पष्ट होती है मामले में न्यायालय ने विजयसिंह (36) पिता चत्तरसिंह देवड़ा निवासी ग्राम दिवेल, दीपक (38) उर्फ दीपु पिता गिरधारी सोनेर निवासी रेल नगर और जस्सु (40) उर्फ जसवंत पिता सोहन सिंह सोलंकी निवासी थावरिया बाजार, वर्तमान पता- आरोग्यम हॉस्पिटल के पास हनुमान मंदिर नाहरपुरा को सजा सुनाई। बता दें कि पुलिस अधीक्षक रतलाम द्वारा इस प्रकरण को चिह्नित एवं सनसनीखेज घोषित किया गया था। सभी आरोपी गिरफ्तारी के दिन से ही जेल में बंद हैं!

News Mp 24
Author: News Mp 24