
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ से बड़ी खबर आ रही है उन्हे निचली अदालत से मिली आजीवन कारावास की सजा को राजस्थान हाइकोर्ट की जोधपुर बेंच के जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित ने देश भर में चर्चित नाबालिग यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम की सजा को बरकरार रखा है।

इस फैसले के बाद अदालत ने आसाराम को सरेंडर करने का आदेश दिया है। वहीं मामले में शामिल दो अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
पिछले माह सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखने के साथ ही बुधवार हाईकोर्ट ने यह निर्णय सुनाया। कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दी गई सजा में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि मामले में प्रस्तुत साक्ष्य और पीड़िता के बयान पर्याप्त हैं।
हम आपको बता दें कि यह मामला उस समय देशभर में सुर्खियों में आया था जब नाबालिग लड़की ने आसाराम पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए थे। जांच और सुनवाई के बाद निचली अदालत ने आसाराम को दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी।

फैसले के बाद अब आसाराम को निर्धारित समय के भीतर सरेंडर करना होगा। फैसले को लेकर कोर्ट परिसर के बाहर सुरक्षा भी बढ़ाई गई थी।
2013 में जब आसाराम पर जोधपुर स्थित आश्रम में एक नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म का आरोप लगा था तब इस मामले की शुरुआत हुई।
उस वक्त आसाराम के सितारे बुलंदी पर थे लेकिन पीड़िता के माता-पिता दबावों के आगे नहीं झुके और पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने के बाद आसाराम और आसाराम के आश्रमों के खिलाफ जांच शुरू हुई थी।
वर्ष 2018 में नाबालिगों से जुड़े विशेष पास्को एक्ट कानूनी प्रावधानों के तहत पॉक्सो अदालत ने आसाराम को दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
आसाराम ने इस फैसले को अपने साथ अन्याय माना। और इस फैसले के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। जिस पर फैसला अब आया है।
अब आसाराम के शिष्यों की मांग है कि आसाराम हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएं और याचिका दाखिल करें।वर्तमान में बापू आसाराम पेरोल है इधर कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें अब कोर्ट में सरेंडर करना होगा।



