उत्कृष्ट आराधक, धर्मनिष्ठ श्रावक श्री माणकचन्द मोगरा (शामगढ़) की चौविहार संथारा आराधना 7 सात दिनों में पूरी हुई

श्री मोगरा ने शनिवार को रात्रि 7:30 बजे अपनी स्वेच्छा से चौवीहार संथारा खुद की सहमति से ग्रहण किया था शारीरिक अस्वस्थता के चलते परिवार के सभी सदस्यों की सहमति द्वारा सुश्रावक शरद नौलखा चौमहला द्वारा संथारा पचखाया गया था।

शुक्रवार को संथारा सीज जाने पर आपकी डोल यात्रा शामगढ़ में शाम 5 बजे पूरे नगर से होती हुई शामगढ़ मुक्ति धाम पहुंची जहां परिवार के सदस्यों ने मुखाग्नि दी

शामगढ़ की पुण्य धरा पर जिनशासन की आराधना एवं प्रभावना में जीवन समर्पित करने वाले धर्मनिष्ठ श्रावक श्री माणकचन्द मोगरा ने तप, संयम, त्याग एवं वैराग्य की उत्कृष्ट साधना करते हुए छः का चौविहार संथारा पूर्ण हो गया
इस पावन अवसर पर उनकी तप, त्याग, संयम, वैराग्य एवं धर्मनिष्ठ भावनाओं की भावपूर्वक अनुमोदना करते हुए हम उनके प्रति श्रद्धा ऐसी तपोनिष्ठ आत्मा की पावन आराधना को सम्पूर्ण जैन समाज द्वारा कोटिशः अनुमोदना एवं भावपूर्ण वंदन करते हुए अन्तिम बिदाई दी गई

श्री मोगरा स्वर्गीय झमक लाल मोगरा के सुपुत्र एवं प्रेमचंद मोगरा पूर्व SDOT रतलाम के बड़े भाई और मुकेश, राजू , गौतम, प्रीतम,मनोज मोगरा के पिताजी थे चौमहला के नौलखा परिवार के दामाद थे
सुश्रावक मानकचंद मोगरा खजूरी पंत वाले ने चोविहार संथारा के प्रत्याख्यान सजगता पुर्वक ग्रहण किये थे ।इस अवसर पर सकल जैन समाज सहित आसपास के क्षेत्र के समाजजनों ने संथारा साधक मोगरा को मुक्ति धाम पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
चौमहला से संजय नवलखा की रिपोर्ट






