पहले स्वयं के भीतर जो राक्षस छुपा है उसे मारो फिर बाहर की आसुरी शक्तियों को खत्म करो,
शिक्षा को मात्र धन कमाने का साधन नहीं समझना चाहिए इसे जीवन निर्माण का मुख्य उद्देश्य समझना सर्वोपरि होगा

मप्र में रतलाम के दयाल वाटिका में आर्ष विद्याकुलम् द्वारा शिक्षा संवाद 3.0″ का तीसरा ऐतिहासिक अधिवेशन
सम्पन्न हुआ। इस आयोजन में शिक्षा में मानवीय मूल्यों के समावेश की आवश्यकता को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों के शिक्षाविदों ने अपने विचार रखते हुए महिला उत्थान से लेकर युवाओं के जीवन को नशा रहित और उन्नतिशील बनाने में शिक्षा के महत्वपूर्ण स्थान पर प्रकाश डाला।

इस आयोजन में मुख्य आकर्षण का केंद्र और प्रसिद्ध वक्ता कुलपति योगेश भारद्वाज मुख्य आकर्षण रहे।
भारद्वाज ने अपने प्रभावी और प्रेरणादाई उद्बोधन में कहा कि 10 करोड़ बच्चे पहली कक्षा में प्रवेश लेते हैं उनमें से लगभग 7 करोड़ बच्चे 12वीं तक पहुंचने के पहले पढ़ना छोड़ देते हैं और यह 7 करोड़ बच्चे अपने परिवार व समाज व देश के लिए बिना शिक्षा ग्रहण किये किस तरह का योगदान दे पाएंगे यह सबको पता है।

विदुषी मातृशक्ति आर्य विराजी ने अपने उद्बोधन में “मर्दानी” पर प्रकाश डाला आपने कहा कि मर्दानी का मतलब मां शक्ति के एक रूप का नाम मात्र नहीं है मर्दानी का मतलब होता है पहले स्वयं के भीतर के राक्षस को मारो फिर बाहर की आसुरी शक्तियों को खत्म करो।

शिक्षा संवाद का अगला संस्करण 4.0 असम में निर्धारित हुआ है। कार्यक्रम के अध्यक्ष नरेंद्र मुनि और जगजीत आर्य रहे। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से शिक्षाविदों की टीम में आचार्य योगेश वैदिक, आचार्य प्रशांत, डॉ अमरजीत विद्यार्थी, डॉ दीप्ति आर्या, विदुषी आर्यवीरा, कृतेश पटेल एवं मोहित गौड़ और गणमान्य आमंत्रित अतिथियों में तुफैल चतुर्वेदी कार्यक्रम के आकर्षण के केंद्र रहे।

उपरोक्त कार्यक्रम में रतलाम, सैलाना, धामनोद, खाचरौद, बूढ़ा, नागदा, उज्जैन सहित अनेक स्थानों के वरिष्ठ नागरिक को माता बहनो एवं क्षेत्र के बुद्धिजीवी वर्ग के लगभग 2000 लोगों ने भाग लिया जिले सहित आसपास की टीम एवं सैलाना तथा धामनोद के स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम में अपना सहयोग प्रदान किया।







