जय गुरुदेवजी का सत्संग के साथ विशाल कलश यात्रा निकाली गई

SHARE:

रतलाम जिले के सागोद में विश्व विख्यात परम पूज्य बाबा जयगुरुदेव जी महाराज कि आध्यात्मिक आलौकिक परलौकिक सत्संग एवं भंडारा महाप्रसादी का आयोजन संपन्न हुआ।  गणेश धाकड़ धर्मशाला से भव्य विशाल शाकाहारी कलश शोभायात्रा निकाली गई जो मंदिर चौपाल होते हुए गांव के प्रमुख स्थानों से होती हुई  रतलाम धोलावाड़ रोड रिंग रोड से होते हुए  धाकड़ धर्मशाला में धर्म सभा में परिवर्तित हुई।

यहां परम पूज्य बाबा जय गुरुदेव जी महाराज की माल्यार्पण कर पूजा ,अर्चना, प्रार्थना की गई। आध्यात्मिक परलौकिक सत्संग बाबा जय गुरुदेव जी महाराज के परम शिष्य राष्ट्रीय उपदेश सतीश चंद्र महाराज के मुखारविंद से बाबा जयगुरुदेव  के सत्संग वचनों का अमृत पान कराया गया। जिसमें आत्मा से परमात्मा को मिलने के लिए सरल मार्ग बताते हुए कहा की  इस संसार में ईश्वर ,भगवान ,परमात्मा ने  धरती पर केवल दो ही जातियां बनाई एक औरत और एक आदमी कुछ काम ऐसे होते हैं जो महिलाएं ही करती है और कुछ काम ऐसे होते हैं जो केवल पुरुष ही करते हैं भारत में कुल 6500 जातियां भारत सरकार के रजिस्टर में दर्ज हैं। भगवान ने जातियां नहीं बनाई। जातियां जात-पात और धर्म मानव ने बनाई है। हजारों लाखों वर्ष पहले जाति बनी जातियां काम के आधार पर बनी जैसे की लोहे का काम करने वाला लोहार, सोने का कार्य करने वाला सोनार, ईंटों का कार्य करने वाला कुम्हार, चमड़े का कार्य करने वाला चर्मकार, धुलाई का कार्य करने वाला धोबी, बुनाई का कार्य करने वाला बुनकर, गाय चराने वाला ग्वाला, पूजा पाठ करने वाला ब्राह्मण। राज पाठ का कार्य करने वाला राजा राजपूत, भगवान राम शाकाहारी थे। और रावण मांसाहारी था। लेकिन जीत राम की हुई क्योंकि राम शाकाहारी थे। अगर कोई सत्संग में आकर अंडा मांस मछली खाए तो उसको मार के भगा दिया जाता है लेकिन किसी होटल अंडा मांस मछली खाएगा तो उसे कोई मना  नहीं करेगा। हिंदू मंदिर में रोज घंटा हरि कीर्तन जोर-जोर से बजाते हैं और भगवान की पूजा करते हैं और शाम होते ही अंडा मांस शराब खाकर जय श्री राम जय श्री राम जोर जोर से जय श्री राम बोलकर चिल्लाते हैं और अपने आप को कहते हैं कि हम हिंदू हैं क्या वे सच्चे हिंदू है । जो एक किलो मांस ,मछली,अंडा खाकर अपने आप को हिंदू कहते हैं। अगर हम सच्चे हिंदू हैं तो हमें शाकाहारी और सदाचारी बनना चाहिए। अपनी आत्मा को सुधारने के लिए हमें समय निकालना पड़ेगा। क्योंकि हम तो रोज समाज सुधार का कार्य कर रहे हैं लेकिन हमारी आत्मा के कल्याण के लिए और आत्मा के सुधार के लिए कार्य नहीं करेंगे तो कैसे काम चलेगा। हमारे घर में दादा-दादी भाई बहन मर जाते हैं तो हम कहते हैं स्वर्गवास हो गया स्वर्गवास हो गया लेकिन क्या वास्तव में उनका स्वर्गवास मिल गया यदि उनका स्वर्गवास मिल गया होता तो स्वर्ग में तो जगह ही नहीं और नरक पूरा खाली पड़ा। यह जमीन मेरी है यह मकान मेरा है यह बंगला ना घर तेरा ना घर मेरा यह चिड़ियों का रैन बसेरा यहां कोई न रहने पाया। इस संसार में कोई भी यहां स्थाई रूप से रहने नहीं आया सबको जाना है इसलिए अपने आत्मा के कल्याण के लिए कुछ सत्कर्म कर लो।

इस अवसर पर बाबूलाल टाक, बद्री लाल पाटीदार ,देवराम रसवाल, दिलीप खराड़ी, भावेश शर्मा, देवी सिंह कटारा ,अमर सिंह निनामा नानजी मईडा,रमेश कुमावत, बंटी खदेड़ा, बाबूलाल खदेड़ा ,मोती राम खदेड़ा, डॉक्टर प्रकाश शर्मा, अशोक धाकड़ ,मुंशीलाल कटारा, प्रकाश भाई धार वाले, वेद प्रकाश गंगवाल, नरु भाई, भानजी डामर ,प्रकाश पाटीदार, मोहनलाल भूरिया, डॉ समरथ भाभर, फुलाजी खराड़ी, शंभूजी,सुनीता पंचोली ,मंजू कुमावत, गुड्डी बाई ,नीता दोहर,समाजसेवी सूरतलालडामर आदि बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

News Mp 24
Author: News Mp 24

best news portal development company in india
best news portal development company in india
सबसे ज्यादा पड़ गई